Breaking News :

बलरामपुर अस्पताल में धूमधाम से मनाया गया ‘विश्व फार्मेसी दिवस’

ज्ञानेश कुमार की मौजूदगी में आयोग की बैठक, अशिष गोयल बोले—कई फैसले सर्वसम्मति से लिए गए

यूपी के उत्पाद बने दुनिया का आकर्षण, जितिन प्रसाद बोले— प्रदेश बन रहा ‘ग्रोथ इंजन’

ओडीओपी से कारीगरों को मिला सीधा बाजार, सुप्रिया निगम ने बताया अनुभव

सुप्रीम कोर्ट की दो सुनवाइयों पर सवाल, जस्टिस शर्मा को लेकर वकीलों के संगठन ने उठाई आपत्ति

मध्यस्थता हर पारिवारिक विवाद का हल नहीं: जस्टिस बीवी नागरत्ना

मध्यस्थता हर पारिवारिक विवाद का हल नहीं: जस्टिस बीवी नागरत्ना

World Tourism Day: UP Tourism Records 7.25-Fold Rise in Nine Years

13 Dead as Military Plane Goes Down in DR Congo

Court Premises Turn Chaotic as Woman Allegedly Assaulted in Maharajganj

Parquet Courts on Resisting Nihilism & Why Tourism in Dubai is booming the world.

Parquet Courts on Resisting Nihilism & Why Tourism in Dubai is booming the world.

Saturday, 26 September 2026

चंदौली, सोनभद्र और मिर्जापुर में प्राचीन रॉक आर्ट का डिजिटल रिकॉर्ड, वैज्ञानिक संरक्षण की बनेगी योजना *रॉक आर्ट से ऐतिहासिक भित्तिचित्रों तक संरक्षण की तैयारी, यूपी में पुरानी विरासत का बनेगा डिजिटल दस्तावेज *चट्टानों पर बनी सदियों पुरानी कला को मिलेगा संरक्षण, डिजिटल मैपिंग से दर्ज होगी यूपी की प्राचीन विरासत

चट्टानों पर उकेरी सदियों पुरानी कहानियां अब होंगी डिजिटल, वैज्ञानिक संरक्षण से सुरक्षित होगी विरासत

लखनऊ, 25 सितंबर 2026: उत्तर प्रदेश में चट्टानों पर उकेरी गई हजारों साल पुरानी कला से लेकर ऐतिहासिक स्मारकों की दीवारों पर बने भित्तिचित्रों तक को संरक्षित किया जाएगा। प्रदेश सरकार प्राचीन रॉक आर्ट का डिजिटल रिकॉर्ड और मैपिंग तैयार कराने के साथ इन चित्रों की मौजूदा स्थिति का वैज्ञानिक आकलन कराएगी। इसके आधार पर संरक्षण की जरूरत और आगे की कार्ययोजना तय की जाएगी और 15वीं से 19वीं शताब्दी के बीच बने ऐतिहासिक भित्तिचित्रों को भी इस संरक्षण कार्यक्रम से जोड़ा जाएगा। इस पहल के जरिए चट्टानों और स्मारकों पर मौजूद प्रदेश की प्राचीन विरासत को व्यवस्थित तरीके से दर्ज कर आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित करने की तैयारी की जा रही है। रॉक आर्ट केवल पुराने चित्रों का संग्रह नहीं है, बल्कि यह उस दौर के जीवन, सोच और मान्यताओं को समझने का महत्वपूर्ण माध्यम भी है। चट्टानों पर बने जानवरों, शिकार और नृत्य से जुड़े चित्र उस समय के लोगों के जीवन और उनके आसपास के वातावरण से जुड़ी जानकारी देते हैं। इन चित्रों के अध्ययन से शोधकर्ताओं को यह समझने में मदद मिल सकती है कि तत्कालीन समुदाय किस तरह रहते थे, अपने आसपास की दुनिया को किस नजर से देखते थे और अपनी मान्यताओं व अनुभवों को चित्रों के माध्यम से किस तरह व्यक्त करते थे। प्रस्तावित योजना के पहले चरण में चंदौली, सोनभद्र, मिर्जापुर और आसपास के क्षेत्रों के रॉक आर्ट स्थलों को शामिल करने का प्रस्ताव है। राज्य पुरातत्व निदेशालय और नई दिल्ली स्थित इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (IGNCA) संयुक्त रूप से इन स्थलों का दस्तावेजीकरण और स्थिति का आकलन करेंगे। विशेषज्ञों की जांच से प्रत्येक स्थल की जरूरतों को समझा जाएगा और उसी के आधार पर संरक्षण के लिए तकनीकी प्रस्ताव तैयार किए जाएंगे। इससे संरक्षण का काम संबंधित स्थल की वास्तविक स्थिति और जरूरत के अनुसार आगे बढ़ाया जा सकेगा। अपर मुख्य सचिव, पर्यटन, संस्कृति एवं धार्मिक कार्य विभाग अमृत अभिजात ने गुरुवार को सितंबर 2025 में दोनों संस्थाओं के बीच हुए समझौते की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को इसके आधार पर वार्षिक कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। अमृत अभिजात ने कहा कि इन चित्रों में पिछली पीढ़ियों की कहानियां, उनकी कल्पना, मान्यताएं और जीवन शैली दर्ज है। इनका संरक्षण केवल चित्रों को बचाना नहीं, बल्कि उनमें छिपे ज्ञान को भी सुरक्षित रखना है। इसके लिए विरासत का भरोसेमंद रिकॉर्ड तैयार करने के साथ उन लोगों को जरूरी जानकारी और कौशल देना भी जरूरी है, जो इसके संरक्षण का काम करेंगे। प्रस्तावित डिजिटल आर्काइव में रॉक आर्ट स्थलों और उनकी वर्तमान स्थिति से जुड़ी जानकारी एक जगह दर्ज की जाएगी। विशेषज्ञों की फील्ड जांच के आधार पर प्रत्येक स्थल की स्थिति और संरक्षण की जरूरत का रिकॉर्ड तैयार होगा। यह डिजिटल दस्तावेज आगे होने वाले अध्ययन और आकलन के लिए भी संदर्भ के रूप में काम करेगा। इससे प्रदेश के प्राचीन रॉक आर्ट स्थलों की जानकारी व्यवस्थित रूप से सुरक्षित रखने और भविष्य में उनके संरक्षण की प्रक्रिया को बेहतर तरीके से आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी। संरक्षण की यह पहल केवल रॉक आर्ट तक सीमित नहीं रहेगी। संरक्षित स्मारकों में मौजूद ऐतिहासिक भित्तिचित्रों पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। इन चित्रों की स्थिति और उनके संरक्षण की जरूरत को समझते हुए वैज्ञानिक तरीके अपनाए जाएंगे। इस तरह कार्यक्रम में एक ओर चट्टानों पर बनी प्राचीन चित्रकला को शामिल किया गया है, तो दूसरी ओर बाद के दौर में स्मारकों और इमारतों की दीवारों पर विकसित हुई चित्रकला परंपरा को भी संरक्षण के दायरे में लाया जाएगा। संरक्षण कार्य शुरू होने से पहले तकनीकी अधिकारियों, कारीगरों, सहायकों और अन्य संबंधित कर्मियों के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की जाएगी। इसमें उन्हें इन चित्रों के ऐतिहासिक और कलात्मक महत्व के साथ-साथ उनके संरक्षण के वैज्ञानिक तरीकों की जानकारी दी जाएगी। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि साइट पर काम करने वाली टीम को चित्रों की प्रकृति, महत्व और संरक्षण की सही प्रक्रिया की जानकारी हो और संरक्षण के दौरान विरासत को किसी तरह का नुकसान न पहुंचे। सर्वेक्षण के दौरान जहां जरूरत महसूस होगी, वहां चुनिंदा स्थलों पर पुरातात्विक अन्वेषण और खुदाई पर भी विचार किया जा सकता है। तैयार की जाने वाली वार्षिक कार्ययोजना राज्य सरकार को भेजी जाएगी और जहां आवश्यक होगा, संबंधित प्रस्ताव मंत्रिमंडल के समक्ष भी रखे जाएंगे। समीक्षा बैठक में राज्य पुरातत्व निदेशक रेनू द्विवेदी, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के आदि दृश्य विभाग की प्रमुख प्रो. रिचा नेगी, संरक्षण विषय की सहायक प्रोफेसर डॉ. सत्येंद्र कुमार, आदि दृश्य विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ. दिलीप कुमार संत और उत्तर प्रदेश राज्य पुरातत्व निदेशालय के उत्खनन एवं अन्वेषण अधिकारी राम विनय मौजूद रहे।

Read Previous

Samsung goes big in India factory ever created

Read Next

Samsung goes big in India factory ever created

Add Comment

Sign up for the Newsletter

Join our newsletter and get updates in your inbox. We won’t spam you and we respect your privacy.