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अमित शाह बोले- भारतीय भाषाओं के सम्मान के साथ आगे बढ़े हिंदी
नई दिल्ली, 14 सितंबर 2026
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने हिंदी के विकास को देश की अन्य भारतीय भाषाओं के सम्मान, संरक्षण और संवर्धन से जोड़ते हुए कहा कि हिंदी को किसी दूसरी भाषा के सामने प्रतिस्पर्धा के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने हिंदी को अलग-अलग भाषाई समुदायों के बीच संवाद और राष्ट्रीय एकात्मता को मजबूत करने वाली महत्वपूर्ण कड़ी बताया।
अमित शाह ने कहा, “हिंदी का विकास भी तभी सार्थक है जब वह सभी भारतीय भाषाओं के सम्मान, संरक्षण और संवर्धन के साथ आगे बढ़े। हिंदी किसी भाषा की प्रतिस्पर्धी नहीं बल्कि भारतीय भाषाओं के बीच आत्मीय संवाद और राष्ट्रीय एकात्मता की एक महत्वपूर्ण कड़ी है।”
उन्होंने इस विचार को भारत के इतिहास से जोड़ते हुए स्वामी दयानंद सरस्वती, महात्मा गांधी और नेताजी सुभाष चंद्र बोस का उदाहरण दिया। उन्होंने बताया कि अलग-अलग मातृभाषाओं से आने वाले इन महापुरुषों ने हिंदी के जनसंपर्क और राष्ट्रीय संवाद की भाषा के रूप में विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
अमित शाह ने कहा, “इस सत्य का सबसे सुंदर प्रमाण हमारा अपना इतिहास है। स्वामी दयानंद सरस्वती जी की मातृभाषा फिर भी इन्होंने सत्यार्थ प्रकाश हिंदी में लिखा। महात्मा गांधी ने उन्नीस सौ अठारह में मद्रास में दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा की स्थापना की। नेताजी सुभाष चंद्र बोस बांग्लाभासी थे पर उन्होंने आजाद हिंद फौज की संपर्क भाषा हिंदी को बनाया और देश को जय हिंद का नारा दिया।”
उन्होंने आगे कहा, “यानी हिंदी को सभी लोगों ने जनसंवाद की भाषा बनाने में बहुत बड़ा योग दिया है। उन महापुरुषों का बहुत बड़ा योगदान हम सब के लिए प्रेरणा का स्त्रोत है। जिनकी अपनी मातृभाषा हिंदी कभी नहीं थी। मेरी अपनी मातृभाषा भी गुजराती है। पर जब मैं देश में किसी भी कोने में जाता हूँ तो जो भाषा मुझे वहां के सामान्य जन से सीधा जोड़ती है वो हिंदी है। हिंदी की यात्रा को देखिए तो उसमें पूरे भारत की यात्रा दिखाई देती है।”
अमित शाह के बयान का मुख्य संदेश यही रहा कि हिंदी का विस्तार भारतीय भाषाओं के बीच दूरी पैदा करने के बजाय संवाद और एकता को मजबूत करने वाला होना चाहिए। उनके अनुसार, हिंदी की यात्रा में भारत की भाषाई विविधता और उसे जोड़ने वाली साझा संवाद की परंपरा दोनों दिखाई देती हैं।
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