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राम मंदिर चढ़ावा जांच में बड़ा खुलासा! चंपत राय के बचाव में उतरे ट्रस्ट कोषाध्यक्ष
लखनऊ, 8 जुलाई 2026
अयोध्या के राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की जांच लगातार नए मोड़ ले रही है। इस बीच श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी ने पूरे घटनाक्रम पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय का बचाव किया है। उन्होंने कहा कि चंपत राय की नीयत पर सवाल नहीं उठाया जा सकता, लेकिन ड्राइवर की नियुक्ति को लेकर हुई लापरवाही ने पूरे मामले को गंभीर बना दिया। उनके मुताबिक, जिस व्यक्ति को ड्राइवर बनाया गया, उसने धीरे-धीरे व्यवस्था के कई अहम हिस्सों तक अपनी पहुंच बना ली थी, जिससे अब कई तरह की आशंकाएं जन्म ले रही हैं।
गोविंद देव गिरी ने कहा, "जब मैं कहता हूं कि वह बेगुनाह हैं, तो मेरा मतलब है कि इस पूरे स्कैंडल में उनका कोई निजी हाथ नहीं हो सकता. मैं उन्हें 32 साल से जानता हूं, इसलिए सोच भी नहीं सकता कि वह ऐसी किसी चीज में शामिल हो सकते हैं. उनकी ईमानदारी पर कोई शक नहीं है." उन्होंने आगे कहा कि यह जरूर माना जाना चाहिए कि चंपत राय अपने काम को लेकर लापरवाह रहे। उनके अनुसार, जिस व्यक्ति को ड्राइवर रखा गया था, उसके पास चाबियां थीं और वह कई व्यवस्थाओं को नियंत्रित करता था। कोषाध्यक्ष ने कहा कि उन्हें शक है कि पूरा घटनाक्रम ड्राइवर ने अंजाम दिया। उन्होंने यह भी आशंका जताई कि ड्राइवर के बाहरी लोगों से संपर्क हो सकते हैं और संभव है कि किसी ने उसे ऐसा करने के लिए उकसाया हो। गोविंद देव गिरी ने कहा कि उन्हें कई बार लगता है कि यह पूरा मामला किसी बड़ी साजिश का हिस्सा भी हो सकता है।
इसी बीच एसआईटी को दिए गए चंपत राय के कथित गोपनीय लिखित बयान का हिस्सा सामने आने का दावा किया गया है। उस कथित बयान में उन्होंने दानपात्रों से निकली नकदी की गिनती, उसकी सुरक्षा, बैंक में जमा कराने की व्यवस्था और बैंक के साथ हुए एमओयू से खुद को अलग बताया था। उन्होंने यह भी कहा था कि संबंधित एमओयू पर उनके हस्ताक्षर नहीं हैं। इसके बाद ट्रस्ट के वरिष्ठ सदस्य अनिल मिश्रा की भूमिका भी चर्चा में आ गई है। बताया जा रहा है कि संबंधित एमओयू पर उनके हस्ताक्षर हैं। सूत्रों के अनुसार, एसआईटी ने उन्हें नोटिस भेजा है और पूछताछ की तैयारी की जा रही है। हालांकि, जांच एजेंसी की ओर से अभी तक इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
इससे पहले चंपत राय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर रामभक्तों के नाम खुले पत्र के जरिए अपने ऊपर लगे आरोपों को निराधार बताया था। उन्होंने कहा था कि वह पिछले 41 वर्षों से प्रचारक जीवन में हैं और 1991 से राम मंदिर आंदोलन से जुड़े हुए हैं। साथ ही उन्होंने उचित समय आने पर सभी आरोपों का तथ्यात्मक जवाब देने की बात कही थी। फिलहाल पूरा मामला एसआईटी की जांच के दायरे में है और अब आगे की दिशा उसकी अंतिम रिपोर्ट तथा उसके आधार पर होने वाली कार्रवाई से तय होगी।
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