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संघर्षों से राष्ट्रपति भवन तक: योगी आदित्यनाथ ने बताया रामनाथ कोविंद की सफलता का सफर
लखनऊ, 14 अक्टूबर 2026
पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के जीवन का उल्लेख करते हुए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संघर्ष, धैर्य और विपरीत परिस्थितियों का सामना करने के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि व्यक्ति की महानता का आकलन इस बात से होता है कि वह कठिन हालात में किस तरह आगे बढ़ता है। योगी ने रामनाथ कोविंद के जीवन सफर को इसी संघर्षशील प्रवृत्ति का उदाहरण बताते हुए उनके अनुभवों और उपलब्धियों का जिक्र किया।
योगी आदित्यनाथ ने कहा, “याद रखना बड़ा वो होता है जिसमें संघर्ष का जज्बा होता है। सम विषम परिस्थितियों से जूझने की जिसकी प्रवृत्ति होती है।”
उन्होंने आगे कहा कि अनुकूल परिस्थितियों में लोककल्याण और विकास के कार्यों को आगे बढ़ाना चाहिए, जबकि विपरीत हालात में संघर्ष से बचने के बजाय उनका सामना करना चाहिए। मुख्यमंत्री के अनुसार, इसी जज्बे ने रामनाथ कोविंद को उस मुकाम तक पहुंचाया, जहां उन्होंने पांच वर्षों तक देश के संवैधानिक प्रमुख के रूप में अपनी जिम्मेदारी निभाई और 145 करोड़ भारतवासियों का प्रतिनिधित्व किया।
मुख्यमंत्री ने रामनाथ कोविंद की कार्यशैली का जिक्र करते हुए कहा कि उन्हें जो भी दायित्व सौंपा गया, उन्होंने उसे सहजता और सरलता के साथ पूरा करने का प्रयास किया। योगी के मुताबिक, कोविंद ने देश की भावनाओं के अनुरूप जिम्मेदारियों का निर्वहन किया। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि रामनाथ कोविंद की यात्रा को समझने के लिए उनके जीवन के शुरुआती संघर्षों और जिम्मेदारियों के प्रति उनके दृष्टिकोण को देखना जरूरी है।
रामनाथ कोविंद के गांव के दौरे का अनुभव साझा करते हुए योगी आदित्यनाथ ने बताया कि उस समय गांव में संसाधनों की कमी थी। इसके बावजूद आंगनवाड़ी केंद्र और बेसिक शिक्षा परिषद के विद्यालयों के लिए बेहतर भवनों की आवश्यकता पर ध्यान दिया गया। उन्होंने बताया कि आगे की शिक्षा के लिए रामनाथ कोविंद ने अपने प्रयासों से जिस विद्यालय भवन का निर्माण कराया था, उसे भव्य स्वरूप देकर राज्य सरकार को सौंप दिया गया। इसके बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने उस भवन को एक अच्छे आवासीय विद्यालय के रूप में विकसित किया। मुख्यमंत्री के बयान में रामनाथ कोविंद के जीवन संघर्ष के साथ-साथ ग्रामीण शिक्षा के लिए किए गए प्रयासों का भी उल्लेख रहा।
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