बिहार में जर्जर स्कूल भवन में पढ़ रहे 191 बच्चे, बेंच-डेस्क के सहारे टिका हिस्सा
बिहार में जर्जर स्कूल भवन में पढ़ रहे 191 बच्चे, बेंच-डेस्क के सहारे टिका हिस्सा
पटना, 04 अक्टूबर 2026
बिहार के दरभंगा जिले के अलीनगर प्रखंड स्थित कीरतपुर प्राथमिक विद्यालय में 191 बच्चे जर्जर भवन के बीच पढ़ाई करने को मजबूर हैं। विद्यालय की छत से पानी टपक रहा है, जबकि भवन का एक पूरा हिस्सा बेंच और डेस्क के सहारे टिका हुआ बताया जा रहा है। स्कूल की ऐसी स्थिति में बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता पैदा हो गई है और किसी भी समय हादसे की आशंका बनी हुई है।
विद्यालय भवन की बदहाल स्थिति को लेकर प्रधानाध्यापक ने संबंधित विभाग को शिकायत दी है। वहीं, बिहार के इस सरकारी स्कूल की स्थिति को लेकर स्थानीय ग्रामीण भी कई बार सड़क जाम कर विरोध-प्रदर्शन कर चुके हैं। इसके बावजूद अब तक समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया गया है। ग्रामीणों का कहना है कि बच्चों की जान को खतरे में डालकर स्कूल का संचालन करना गंभीर लापरवाही है और प्रशासन को तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए।
मामले में स्कूल भवन के निर्माण की गुणवत्ता और उसके रखरखाव की पूरी जांच की मांग उठ रही है। यह पता लगाया जाना जरूरी है कि भवन का निर्माण कितने वर्ष पहले हुआ था और करीब 20 साल के भीतर ही उसकी स्थिति इतनी खराब कैसे हो गई। निर्माण कार्य में लापरवाही बरतने वाले ठेकेदार से लेकर निर्माण और भुगतान से जुड़े अधिकारियों तक की भूमिका की जांच होनी चाहिए। यदि सरकारी धन के इस्तेमाल में अनियमितता सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।
यह मामला बिहार में सरकारी स्कूलों के निर्माण और रखरखाव की व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करता है। एक बार भवन निर्माण पर सरकारी राशि खर्च होने के बाद यदि लगातार उसी इमारत की मरम्मत और रखरखाव पर धन खर्च करना पड़े, तो इसकी गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था की समीक्षा जरूरी है। ऐसे मामलों में केवल जर्जर भवन की मरम्मत कर समस्या को टालने के बजाय यह भी जांचना जरूरी है कि अब तक रखरखाव के नाम पर कितना पैसा खर्च हुआ और उसका वास्तविक परिणाम क्या रहा।
कीरतपुर प्राथमिक विद्यालय की स्थिति बिहार में सरकारी स्कूलों के बुनियादी ढांचे की निगरानी की जरूरत को सामने लाती है। 191 बच्चों की पढ़ाई ऐसे भवन में हो रही है, जिसका एक हिस्सा बेंच-डेस्क के सहारे टिका होने की बात सामने आई है। ऐसे में किसी हादसे का इंतजार करने के बजाय भवन की तकनीकी जांच, आवश्यक मरम्मत और बच्चों के लिए सुरक्षित शैक्षणिक वातावरण सुनिश्चित करने की दिशा में तत्काल कदम उठाना जरूरी है।
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