आईबीएसए व ‘ग्लोबल साउथ’ संग भारत का साझा संकल्प
न्यूयॉर्क। संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) के 81वें सत्र के इतर न्यूयॉर्क में भारत की कूटनीतिक सक्रियता लगातार नए आयाम छू रही है। कैरिकॉम और फिपिक वार्ताओं के बाद, विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने वैश्विक मंच पर ‘ग्लोबल साउथ’ की प्राथमिकताओं और एक मजबूत बहुपक्षीय व्यवस्था को रेखांकित करने वाली दो और अत्यंत महत्वपूर्ण बैठकों में हिस्सा लिया।
विदेश मंत्री जयशंकर ने वैश्विक वास्तविकताओं पर केंद्रित एक विशेष सत्र ‘रप्चर्स एंड रैम्पार्ट्स: बिल्डिंग ब्रिजेज फॉर ए चेंजिंग वर्ल्ड’ में विकासशील देशों के अपने समकक्षों के साथ विस्तृत चर्चा की। इस महत्वपूर्ण संवाद में भारत के साथ जमैका, घाना और सूरीनाम के विदेश मंत्रियों ने हिस्सा लिया। बदलते वैश्विक परिदृश्य और भू-राजनीतिक चुनौतियों के बीच आयोजित इस सत्र में सभी नेताओं ने एक स्वर में स्वीकार किया कि वैश्विक शांति और सहयोग के लिए संयुक्त राष्ट्र पूरी तरह से अपरिहार्य बना हुआ है।
जयशंकर ने ‘एक्स’ पर लिखा जियोपॉलिटिकल बंटवारे, टकराव, जलवायु परिवर्तन, आर्थिक अनिश्चितता और टेक्नोलॉजी में बड़े बदलावों के बीच 'ग्लोबल साउथ' की आवाज़ अहम बनी रहेगी। दुनिया सिर्फ़ दो विकल्पों (बाइनरी चॉइस) से तय नहीं होगी। देश अपने हितों, मूल्यों और भरोसे के आधार पर अपने फ़ैसले लेते रहेंगे।
इससे पहले डॉ. जयशंकर ने दक्षिण अफ्रीकी विदेश मंत्री रोनाल्ड लमोला और ब्राज़ील के विदेश मंत्री मौरो विएरा के साथ 'आईबीएसए (भारत-ब्राजील-दक्षिण अफ्रीका) संवाद मंच' के विदेश मंत्रियों की उच्च-स्तरीय बैठक में भाग लिया। इस बैठक के दौरान तीनों बड़े लोकतांत्रिक देशों के नेताओं ने संयुक्त राष्ट्र चार्टर, अंतरराष्ट्रीय कानून के सिद्धांतों और एक अधिक मजबूत व न्यायसंगत बहुपक्षीय व्यवस्था के प्रति अपनी दृढ़ प्रतिबद्धता व्यक्त की। नेताओं ने वैश्विक निर्णयों में विकासशील देशों की प्रभावी भागीदारी पर विशेष बल दिया।
बैठक के बाद डॉ. जयशंकर ने संयुक्त मीडिया बयान की जानकारी एक्स पर साझा करते हुए लिखा हमने यूएनएससी में व्यापक सुधार का समर्थन किया। ग्लोबल साउथ पर संघर्षों के असर (ऊर्जा, खाद्य असुरक्षा, महंगाई) को लेकर चिंता जताई। पहलगाम आतंकी हमले की कड़ी निंदा और आतंकवाद के प्रति ज़ीरो टॉलरेंस को दोहराया। महिलाओं को सशक्त बनाने और सामाजिक व आर्थिक बाधाओं को दूर करने के प्रति पूरी प्रतिबद्धता जताई।
ये दोनों ही बैठकें स्पष्ट रूप से दर्शाती हैं कि भारत न केवल अंतरराष्ट्रीय कानून और एक न्यायसंगत बहुपक्षीय व्यवस्था का मुखर समर्थक है, बल्कि वैश्विक मंचों पर 'ग्लोबल साउथ' की जमीनी असलियतों, उनकी विकास प्राथमिकताओं और संयुक्त राष्ट्र में सुधार की मांग को बेहद मजबूती से आवाज दे रहा है।
(रिपोर्ट. शाश्वत तिवारी)
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