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प्रियंका गांधी का BJP पर गंभीर आरोप, कहा- संघीय ढांचे को बदलने की साजिश था ये विधेयक
नई दिल्ली: प्रियंका गांधी ने कहा, केंद्र की एनडीए सरकार की लोकतंत्र को कमजोर करने और संघीय ढांचे को बदलने की साजिश संसद में विफल हो गई। उन्होंने कहा कि कल (शुक्रवार) लोकसभा में जो हुआ वह लोकतंत्र और विपक्षी एकता की बड़ी जीत है।
कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने लोकसभा में महिला आरक्षण से संबंधित संविधान संशोधन विधेयक के पारित नहीं होने का हवाला देते हुए शनिवार को कहा कि यह विधेयक संघीय ढांचे को बदलने का षड्यंत्र था और इसका गिरना संविधान एवं विपक्षी एकजुटता की जीत है।
प्रियंका गांधी ने दिल्ली में मीडिया को संबोधित करते हुए कहा, "केंद्र की एनडीए सरकार की लोकतंत्र को कमजोर करने और संघीय ढांचे को बदलने की साजिश संसद में विफल हो गई। उन्होंने कहा कि कल (शुक्रवार) लोकसभा में जो हुआ वह लोकतंत्र और विपक्षी एकता की बड़ी जीत है।"
प्रियंका गांधी ने कहा कि सरकार 2023 के नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लोकसभा की वर्तमान 543 सीट के आधार पर तत्काल लागू कर सकती है और यदि वह ऐसा करती है तो विपक्ष इसका समर्थन करेगा। उन्होंने संवाददाताओं से कहा, ''कल जो हुआ, वह लोकतंत्र के लिए बहुत बड़ी जीत है, संघीय ढांचे को बदलने की साजिश को हराया गया।''
उन्होंने कहा कि विपक्ष की एकता और संविधान की जीत हुई है। प्रियंका गांधी ने कहा, ''पूरी साजिश यही रची गई कि किसी न किस तरह स्थायी रूप से सत्ता में रहना है। यह काम महिलाओं के नाम पर करने का प्रयास किया गया।'' उन्होंने दावा किया कि महिलाओं का ''मसीहा'' बनने की कोशिश की गई, लेकिन ऐसे नहीं होता और महिलाओं का ''मसीहा'' बनने के लिए काम करना होता है।
प्रियंका गांधी ने कहा कि यह संविधान संशोधन विधेयक महिला आरक्षण के लिए नहीं था, यह परिसीमन के लिए था और यह बिल्कुल साफ था कि विपक्ष इसे समर्थन नहीं देने वाला था। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा, ''सरकार के लोग कह रहे हैं कि कल काला दिन था। हां, उनके लिए काला दिन इसलिए है कि उन्हें पहली बार धक्का लगा है।''
उन्होंने कहा, ''अगर महिला आरक्षण लागू करना है तो 2023 के कानून को लागू कीजिए जिसमें पूरा विपक्ष साथ देगा।'' लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण 2029 के लोकसभा चुनाव से लागू करने से संबंधित संविधान संशोधन विधेयक शुक्रवार को संसद के निचले सदन में पारित नहीं हो पाया था।
सदन में 'संविधान (131वां) संशोधन विधेयक 2026', पर हुए मत विभाजन के दौरान इसके पक्ष में 298 और विरोध में 230 वोट पड़े। लोकसभा में किसी भी संविधान संशोधन विधेयक को पारित करने के लिए दो तिहाई बहुमत की जरूरत होती है। सरकार ने इस विधेयक के साथ 'परिसीमन विधेयक, 2026' और 'संघ राज्य विधि (संशोधन) विधेयक, 2026' को भी सदन में चर्चा और पारित कराने के लिए रखा था, लेकिन उन्हें भी आगे नहीं बढ़ाया जा सका।
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