Deepawali 2026: धनतेरस पर बनाएं कुबेर-लक्ष्मी 'धन वर्षा पोटली': वर्षभर घर में बनी रहेगी सुख-समृद्धि
दीपावली की पावन रात महालक्ष्मी पृथ्वी पर भ्रमण करती हैं और अपने भक्तों को धन-धान्य का आशीर्वाद देती हैं। यदि आप चाहते हैं कि आपके घर और व्यापार में पूरे वर्ष बरकत बनी रहे, तो दीपावली पूजन के समय 'कुबेर-लक्ष्मी धन वर्षा पोटली' जरूर स्थापित करें।
1. पोटली बनाने का सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त
धनतेरस की शाम: प्रदोष काल के शुभ समय में।
दीपावली की रात्रि: महालक्ष्मी पूजन के मुख्य मुहूर्त में।
2. आवश्यक सामग्री
आधार वस्त्र: लाल या पीले रंग का नया व पवित्र वर्गाकार कपड़ा, पोटली बांधने के लिए रक्षासूत्र (मौली/कलावा)।
दिव्य प्रतीक: 5 या 7 पीली कौड़ियां (सफेद कौड़ियों को हल्दी में रंग लें), 5 या 7 गोमती चक्र, 5 या 7 कमलगट्टे के बीज।
पवित्र अनाज व मसाले: साबुत अक्षत (बिना टूटे चावल), साबुत धनिया, 2 या 5 साबुत हल्दी की गांठें, हरी इलायची और लौंग।
लक्ष्मी-कुबेर मुद्रा: एक चांदी का सिक्का (जिस पर लक्ष्मी-गणेश अंकित हों) या नए कड़क नोट/सिक्के।
पूजन सामग्री: गंगाजल, कुमकुम, हल्दी और ताजे पुष्प।
3. चरण-दर-चरण निर्माण एवं पूजन विधि
कपड़े का शुद्धिकरण: लाल या पीले कपड़े को गंगाजल छिड़ककर शुद्ध करें और पूजा की चौकी पर बिछाएं।
सामग्री का संयोजन: कपड़े के ठीक बीच में चांदी का सिक्का रखें। इसके बाद अक्षत, साबुत धनिया, हल्दी की गांठें, कौड़ियां, गोमती चक्र, कमलगट्टे, लौंग, इलायची और पूज्य पुष्प रखें।
तिलक एवं अर्पण: सभी रखी हुई सामग्रियों पर कुमकुम और हल्दी से तिलक करें।
मंत्र सिद्ध अभिमंत्रण: पोटली की सामग्री के समक्ष बैठकर कमलगट्टे की माला से मां लक्ष्मी और कुबेर देव के मंत्रों का जाप करें:
महालक्ष्मी मंत्र (कम से कम 21 या 108 बार):
ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं ॐ महालक्ष्म्यै नमः॥
कुबेर मंत्र (108 बार):
ॐ कुबेराय नमः॥
पोटली का रूप देना: मंत्र जाप के बाद कपड़े के चारों कोनों को मिलाकर पोटली का आकार दें और मौली (कलावे) से कसकर बांध लें।
देव पूजन: तैयार पोटली को दीपावली पूजन के दौरान मां लक्ष्मी और कुबेर देव के चरणों में समर्पित करें।
4. तिजोरी में स्थापना और नियम
स्थापना स्थान: दीपावली पूजन के अगले दिन प्रातःकाल इस पोटली को श्रद्धापूर्वक उठाकर अपने घर या दुकान की तिजोरी, गल्ले या कैश बॉक्स में रखें।
गोपनीयता का नियम: पोटली को तिजोरी में स्थापित करने के बाद वर्षभर के लिए इसे न तो खोलें और न ही इसकी सामग्री को बार-बार देखें।
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