यूपी के 75 जिलों में गूंजेगा रामायण पाठ, महर्षि वाल्मीकि जयंती पर सैकड़ों मंदिरों में होंगे भजन और दीपदान
लखनऊ, 23 अक्टूबर 2026:
उत्तर प्रदेश में महर्षि वाल्मीकि जयंती पर 26 अक्टूबर को आस्था, भक्ति और भारतीय सांस्कृतिक विरासत का व्यापक उत्सव मनाया जाएगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यानाथ के निर्देशानुसार प्रदेश के सभी 75 जिलों में सैकड़ों महर्षि वाल्मीकि मंदिरों और रामायण से जुड़े प्रमुख स्थलों पर दीपदान, रामायण पाठ, भजन और भक्तिमय सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इन आयोजनों के जरिए आदि कवि महर्षि वाल्मीकि की कालजयी रचना *रामायण* में निहित मानवीय संवेदनाओं, सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय मूल्यों को जन-जन तक पहुंचाने की तैयारी है।
*वाल्मीकि की तपोस्थली लालापुर में होंगे वृहद कार्यक्रम*
चित्रकूट के क्षेत्रीय पर्यटन अधिकारी डीके शर्मा ने बताया कि, योगी सरकार के निर्देशानुसार महर्षि वाल्मीकि की तपोस्थली लालापुर, चित्रकूट में जिला प्रशासन की ओर से वृहद कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। जिसमें रामलीला का मंचन, वाल्मीकि रामायण पाठ, भजन संध्या और स्थानीय कलाकारों द्वारा लोक भजन के कार्यक्रम होंगे। इसके अलावा तमसा गंगा नदी (जिसे वाल्मीकि नदी भी कहा जाता है) के घाट पर वाल्मीकि आरती होगी। इस आयोजन में हजारों की संख्या में श्रद्दालु शामिल होते हैं।
संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि, महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित रामायण भारतीय साहित्य और संस्कृति की महत्वपूर्ण कृति है। इसमें वर्णित अनेक स्थलों को राम-जानकी मार्ग और राम वन गमन मार्ग के रूप में जाना जाता है। देशभर में ऐसे करीब 280 स्थल मौजूद हैं, जिनमें उत्तर प्रदेश के भी कई महत्वपूर्ण स्थान शामिल हैं। उन्होंने बताया इन स्थलों की धार्मिक और सांस्कृतिक महत्ता को सामने लाने के लिए मंदिरों में दीप प्रज्ज्वलन और दीपदान के साथ 8, 12 या 24 घंटे तक लगातार वाल्मीकि रामायण पाठ कराने की व्यवस्था की जाएगी। इसके साथ ही श्रीराम, हनुमान और रामायण से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण मंदिरों में भी भजन और सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे। उन्होंने यह भी बताया पिछले वर्ष पूरे प्रदेश के 600 से ज्यादा मंदिरों में कार्यक्रम संपन्न कराए गए थे और इस वर्ष भी आयोजन को वृहद स्तर पर सफलतापूर्वक संपन्न कराया जाएगा।
*लवकुश प्रसंग का होगा आयोजन*
इस आयोजन में पूजन-हवन के साथ लवकुश प्रसंग समेत अन्य कार्यक्रम भी होंगे। इसके अलावा तुलसीदास आश्रम राजापुर चित्रकूट, वाल्मीकि आश्रम बिठूर कानपुर, वाल्मीकि आश्रम श्रावस्ती, अयोध्या, प्रयागराज समेत पूरे प्रदेश में आयोजन होगा।
आयोजनों को व्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने के लिए प्रत्येक जिले में जिला, तहसील और विकासखंड स्तर पर समितियां गठित की जाएंगी। जिलाधिकारी अपनी अध्यक्षता में गठित समिति के माध्यम से कार्यक्रम स्थलों और कलाकारों का चयन करेंगे। इसमें संस्कृति विभाग, सूचना एवं जनसंपर्क विभाग और जिला पर्यटन एवं संस्कृति परिषद, उत्तर प्रदेश समन्वय करेंगे। साथ ही स्थानीय जनप्रतिनिधियों को आमंत्रित करने और आम लोगों की अधिकाधिक भागीदारी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
जिला प्रशासन को सभी आयोजन स्थलों पर साफ-सफाई, पेयजल, सुरक्षा, ध्वनि, प्रकाश जैसी व्यवस्थाएं समय से पूरी कराने के निर्देश दिए गए हैं। लगातार रामायण पाठ के लिए रामायण की उपलब्धता पहले से सुनिश्चित की जाएगी। गायक कलाकारों और भजन मंडलियों का चयन कर उन्हें समय रहते सूचना दी जाएगी। मंदिरों और स्थलों की पहचान के साथ उनके नाम-पते, फोटो, जीपीएस लोकेशन और मंदिर प्रबंधकों के संपर्क विवरण संस्कृति विभाग के पोर्टल पर उपलब्ध होंगे। चयनित कलाकारों और भजन गायकों के नाम, पते और मोबाइल नंबर भी पोर्टल पर दर्ज किए जाएंगे।
संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री ने बताया कि, कलाकारों के मानदेय के भुगतान के लिए प्रत्येक जिले को 1 लाख रुपये दिए जाएंगे। इस मद में कुल 75 लाख रुपये जिला पर्यटन एवं संस्कृति परिषदों को उपलब्ध कराए जाएंगे। वहीं, कार्यक्रमों की अन्य व्यवस्थाएं जिला प्रशासन कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) के माध्यम से करेगा। सभी जिलाधिकारियों को विभिन्न विभागों के बीच समन्वय स्थापित कर आयोजन भव्यता और समयबद्ध तरीके से संपन्न कराने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने बताया प्रदेश सरकार की इस पहल का उद्देश्य महर्षि वाल्मीकि की विरासत को सम्मान देने के साथ रामायण के संदेशों, भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं और सामाजिक मूल्यों को व्यापक जनभागीदारी के जरिए आगे बढ़ाना है।
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