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गुजरात से दिल्ली तक: 25 साल में उद्योग और विकास का नया अध्याय
नई दिल्ली, 07 अक्टूबर 2026
नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे होने के साथ उनके नेतृत्व में उद्योग, निवेश और विकास से जुड़ी नीतियों के सफर पर भी नजर जाती है। गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में शुरू हुआ औद्योगिक विकास का अनुभव प्रधानमंत्री बनने के बाद राष्ट्रीय स्तर की नीतियों में दिखाई दिया। निवेश को बढ़ावा देने, कारोबार के लिए अनुकूल माहौल तैयार करने और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने पर इस दौरान विशेष जोर रहा।
गुजरात में निवेशकों का भरोसा बढ़ाने के उद्देश्य से 2003 में वाइब्रेंट गुजरात सम्मेलन की शुरुआत हुई। यह सरकार और उद्योग जगत के बीच संवाद का प्रमुख मंच बना, जहां निवेश की संभावनाओं के साथ कारोबार से जुड़ी समस्याओं पर भी चर्चा हुई। राज्य में औद्योगिक विकास को केवल कारखानों की स्थापना तक सीमित नहीं रखा गया, बल्कि बंदरगाहों, सड़कों, बिजली, औद्योगिक क्षेत्रों और विभिन्न उद्योग समूहों के विकास को भी साथ आगे बढ़ाया गया। बाद में कई अन्य राज्यों ने भी निवेश सम्मेलनों की इसी व्यवस्था को अपनाया।
2014 में नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद औद्योगिक विकास से जुड़ी नीतियों को देशव्यापी स्तर पर आगे बढ़ाया गया। जीएसटी, दिवाला एवं दिवालियापन संहिता, डिजिटल प्रणालियों और नए श्रम कानूनों जैसे सुधारों के जरिए कारोबार से जुड़ी प्रक्रियाओं को सरल बनाने का प्रयास किया गया। इसके साथ सड़क, रेलवे, बंदरगाह, हवाई अड्डे और एक्सप्रेसवे के विस्तार पर बड़े पैमाने पर निवेश हुआ। बेहतर संपर्क व्यवस्था से माल की आवाजाही में लगने वाले समय और लागत को कम करने की दिशा में काम हुआ। आर्थिक गतिविधियों में वृद्धि के साथ घरेलू बाजार का विस्तार हुआ और व्यापार समझौतों के जरिए भारतीय कंपनियों के लिए विदेशी बाजारों में अवसर भी बढ़े।
वैश्विक आपूर्ति शृंखला में बदलाव के बीच भारत में विनिर्माण को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया गया। कोरोना महामारी, अंतरराष्ट्रीय संघर्षों और तकनीकी प्रतिबंधों के बाद कंपनियों के लिए भरोसेमंद उत्पादन केंद्रों की अहमियत बढ़ी है। इसी संदर्भ में उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन योजना यानी पीएलआई को औद्योगिक विस्तार की महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा गया। 14 क्षेत्रों में 2.4 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश की प्रतिबद्धता के साथ उत्पादन, रोजगार और निर्यात बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है। इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर के साथ रक्षा उत्पादन में भी घरेलू क्षमता विकसित करने पर जोर बढ़ा है। पिछले 12 वर्षों में भारत के रक्षा निर्यात में 56 गुना वृद्धि का दावा किया गया है।
आने वाले समय में भारतीय उद्योग के सामने ऐसी मध्यम आकार की कंपनियां तैयार करने की चुनौती है, जो आगे चलकर वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा कर सकें। इसके लिए स्टार्टअप, अनुसंधान और नई तकनीकों में लंबे समय के निवेश को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अनुसंधान, विकास एवं नवाचार को बढ़ावा देने के लिए एक लाख करोड़ रुपये के कोष की व्यवस्था की गई है। मोदी के 25 वर्षों के सार्वजनिक जीवन के दौरान गुजरात में जल प्रबंधन, स्वच्छता, निवेश और बुनियादी ढांचे से लेकर केंद्र में जनधन, डिजिटल इंडिया, प्रत्यक्ष लाभ अंतरण, प्रधानमंत्री आवास, जल जीवन मिशन, कृषि सुधार, बैंकिंग सुधार, नए आपराधिक कानून और डिजिटल भुगतान जैसी पहलों पर जोर दिया गया। अब इस 25 वर्ष की यात्रा के बाद भारतीय उद्योग के लिए अगली दिशा अनुसंधान, नवाचार और वैश्विक बाजार में अपनी मौजूदगी बढ़ाने की है, ताकि देश की कंपनियां घरेलू जरूरतों के साथ दुनिया की मांग को भी पूरा करने की क्षमता विकसित कर सकें।
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