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2017 से पहले यूपी में होती थी गो तस्करी, योगी सरकार ने बंद किए अवैध बूचड़खाने

यूपी न्यूज़ : सीएम योगी के हाथों 28 लाख विद्यार्थियों को मिली छात्रवृत्तिः शिक्षा क्षेत्र में नई ऊर्जा का संचार, भविष्य को मिला संबल

समाजवाद के नाम पर ‘परिवारवादी’ खा जाते थे गरीबों का हकः मुख्यमंत्री

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Monday, 30 March 2026

सीएम योगी ने कक्षा 9-10 तथा दशमोत्तर के 27,99,982 विद्यार्थियों के बैंक खाते में 3350 करोड़ की छात्रवृत्ति/शुल्क प्रतिपूर्ति का किया अंतरण

समाजवाद के नाम पर ‘परिवारवादी’ खा जाते थे गरीबों का हकः मुख्यमंत्री

लखनऊ, 30 मार्च। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को प्रदेशवासियों के हित में दो बड़े कार्य किए। सुबह आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को विकास योजनाओं व तकनीक से जोड़ा तो शाम को वंचित व कमजोर वर्ग के कक्षा 9-10 तथा दशमोत्तर के 27,99,982 विद्यार्थियों के बैंक खाते में 3350 करोड़ की छात्रवृत्ति/शुल्क प्रतिपूर्ति का अंतरण किया। सीएम ने गरीब परिवारों के मुख्य अर्जक की मृत्यु होने पर राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना के अंतर्गत 33,334 आश्रित परिवारों को भी 100 करोड़ रुपये की सहायता राशि का अंतरण किया। इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित समारोह में छात्रवृत्ति पाने वाले बच्चों को शुभकामनाएं देते हुए मुख्यमंत्री ने अपने विचार भी प्रकट किए। उन्होंने समाजवादी पार्टी के नेताओं को जमकर आड़े हाथ लिया और कहा कि समाजवाद के नाम पर परिवारवादी गरीबों का हक खा जाते थे। लेकिन, गरीबों के हक पर डकैती डालने वालों को मालूम है कि अब ऐसा किया तो जेल जाना पड़ेगा। सरकार उनके बाप-दादा की कमाई भी जब्त कर गरीबों में बांटेगी।


सीएम ने बच्चों को दिया परिश्रम का मूलमंत्र-


सीएम ने बच्चों से कहा कि यह छात्रवृत्ति इसलिए है कि आप और मेहनत कर सकें। परिश्रम का कोई विकल्प नहीं हो सकता। छात्रवृत्ति संबल का काम कर रही है, यह आपकी मंजिल नहीं है, आपकी मंजिल परिश्रम है। परिश्रम से प्राप्त अंक ही मंजिल पर ले जाएंगे। यदि मेहनत में कोताही बरती, छात्रवृत्ति की धनराशि का दुरुपयोग किया और परिणाम खराब आया तो यह स्वतः ही बाधित हो जाती है। ऐसी नौबत न आने पाए। 


जब संवेदना का हिस्सा बनती है सेवा तो ‘सबका साथ-सबका विकास’ होता है-


सीएम योगी ने कहा कि सरकार ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में 67 लाख बच्चों को 4800 करोड़ रुपये की छात्रवृत्ति उपलब्ध कराई। जब सेवा संवेदना का हिस्सा बनती है तो सरकार का लक्ष्य व्यक्ति, जाति-संप्रदाय नहीं, बल्कि सबका साथ-सबका विकास होता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का प्रेरणादायी मंत्र सबका साथ-सबका विकास बिना भेदभाव सभी समुदायों को छात्रवृत्ति योजना से जोड़ता है। अनुसूचित जाति-जनजाति के शत-प्रतिशत, पिछड़ी जाति के विद्यार्थियों, सामान्य वर्ग के अतिगरीब व अल्पसंख्यक समुदाय के छात्रों की पढ़ाई के लिए प्लेटफॉर्म उपलब्ध हो और उन्हें समय पर छात्रवृत्ति मिले, सरकार की पहले ही दिन से यह मंशा थी। 


सपा ने प्रदेश को इतना लूटा कि हमारी सरकार को 2017-18 के साथ 2016-17 के बच्चों की भी छात्रवृत्ति देनी पड़ी थी-


मुख्यमंत्री ने कहा कि 2016-17 में समाजवादी पार्टी ने अनुसचित जाति-जनजाति के छात्रों को छात्रवृत्ति ही नहीं दी, क्योंकि उन्होंने तब तक प्रदेश को इतना लूट डाला था कि खाते में पैसा ही नहीं था। जो राशि केंद्र सरकार से छात्रवृत्ति के लिए आई थी, उसे भी उन्होंने समाजवादी पार्टी के कार्यों के लिए डायवर्ट कर दिया था। 2017 में जब हमारी सरकार आई तो 2017-18 के साथ ही हमें 2016-17 के बच्चों को भी छात्रवृत्ति देनी पड़ी। 


पहले तकनीक का उपयोग नहीं होता था, छात्रवृत्ति के पैसे में मनमानी करते थे अधिकारी-


सीएम योगी ने कहा कि पहले छात्रवृत्ति की राशि कम होती थी और उसमें भी तकनीक का उपयोग नहीं होता था। पैसा जिले में जाता था, वहां समाज कल्याण, पिछड़ा वर्ग तथा अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के अधिकारी मनमानापन करते थे। छात्रों को 500 की बजाय 200-250 रुपये ही छात्रवृत्ति मिल पाती थी। पीएम ने तकनीक पर ध्यान देने को कहा, जिससे आज एक क्लिक पर 28 लाख छात्रों के खाते में 3350 करोड़ रुपये पहुंच गए। यह दर्शाता है कि तकनीक जीवन को आसान बनाने के साथ ही भ्रष्टाचार मुक्त व्यवस्था देती है। 


2017 के पहले हर क्षेत्र में था भ्रष्टाचार, आधी राशि खा जाते थे सपा के गुंडे-


सीएम योगी ने कहा कि 2017 के पहले हर क्षेत्र में भ्रष्टाचार था। कुपोषित बच्चों व नवजात शिशुओं के पोषण आहार, कुपोषित माताओं के पोषाहार, छात्रों की छात्रवृत्ति, विकास योजनाओं, राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ समेत सभी योजनाओं में भ्रष्टाचार था। सीएम योगी ने पूर्व मुख्यमंत्री व सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव पर तंज कसते हुए कहा कि उनका बयान था कि सरकार एक हजार रुपये पेंशन राशि क्यों देती है। उनके समय में दिव्यांगजनों को महज 300 रुपये मिलते थे, वह भी समय से नहीं। छह महीने में एक साथ 1800 रुपये जाते थे, लेकिन इसमें से दिव्यांग को केवल 900 रुपये मिलते थे और 900 रुपये इनके लोग चट कर जाते थे। विधवा-वृद्धजन पेंशन के रूप में 500 रुपये मिलते थे, छह महीने में एक साथ 3000 रुपये जाते थे। इसमें से 1500 रुपये सपा के गुंडे और बाबू हड़प कर जाते थे। सपा शासन में आधी राशि भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाती थी। यूपी में आज 1.06 करोड़ निराश्रित महिलाओं, वृद्धजनों व दिव्यांगजनों को 12 हजार रुपये सालाना पेंशन राशि सीधे अकाउंट में मिलती है। कटौती करने वालों को मालूम है कि गरीबों के हिस्से में डकैती डालेगा तो उसकी जगह जेल होगी और सरकार बाप-दादा की कमाई भी जब्त कर गरीबों में बांटेगी। 


समाजवाद के नाम पर परिवारवादी खा जाते थे सहायता राशि-


सीएम योगी ने राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना का जिक्र किया, कहा कि इसके लाभार्थियों को पेंशन व 30 हजार रुपये की राशि भी दी जा रही है। इसके तहत आज 100 करोड़ रुपये जारी हुए हैं। 2025-26 में 1.36 लाख से अधिक परिवारों को 412 करोड़ रुपये से अधिक सहायता राशि प्रदान की गई है। 2017 से अब तक 10 लाख से अधिक परिवारों को 3039 करोड़ रुपये से अधिक राशि दी जा चुकी है। पहले यह राशि गरीबों को नहीं मिलती थी। बच्चों की सहायता, माताओं का राशन, गरीबों व वंचितों को मिलने वाली सरकार की सहायता समाजवाद के नाम पर परिवारवादी खा जाते थे। गरीब लाचार-हताश होकर भटकते थे। 


सपा के काले कारनामों के कारण ‘बीमारू’ बना था यूपी-


सीएम ने आरोप लगाया कि 2017 के पहले सत्ता के संरक्षण में पलने वाले गुंडे समानांतर सरकार चलाते थे। वंचित, दलितों की सुनवाई नहीं होती थी। सपा प्रदेश में चार बार सत्ता में आई, लेकिन एक भी दलित महापुरुष-संत व सामाजिक न्याय से जुड़े महापुरुष के प्रति सम्मान का भाव नही रखा। कन्नौज में बाबा साहेब के नाम पर बने मेडिकल कॉलेज का नाम सपा सरकार ने बदल दिया, हमारी सरकार ने फिर से उसका नाम बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर के नाम पर रखा। लखनऊ में भाषा विश्वविद्यालय मान्यवर कांशीराम के नाम पर था, जिसे बदल दिया गया था। सपा नाम बदलने में माहिर थी, उन्हें महापुरुषों से चिढ़ थी। यही काम करके वे लोग आज समाज को अपमानित करते हैं। ये लोग संवैधानिक संस्थाओं, संसद, प्रधानमंत्री, चुनाव आयोग, न्यायपालिका के बारे में टिप्पणी करते हैं। संवैधानिक संस्थानों व राष्ट्र के प्रतीकों पर अंगुली उठाने का मतलब बाबा साहेब द्वारा बनाए गए संविधान का अपमान। यह अपमान बाबा साहेब का अपमान है। दलित, गरीब, वंचित यह स्वीकार नहीं कर सकता। ये लोग राष्ट्रगान-राष्ट्रगीत का अपमान करते हैं, समाज को जाति-सामाजिक वैमनस्यता से बांटते हैं और सत्ता में रहने पर परिवार का भरण-पोषण करते थे। तुष्टिकरण के नाम पर राष्ट्रीय सुरक्षा से खिलवाड़ करते थे। इनके काले कारनामों के कारण ही यूपी ‘बीमारू’ बन गया था। देश-दुनिया में प्रदेश के नौजवान पहचान के संकट से गुजरते थे और अपनी पहचान छिपाते थे। 


मिशन रोजगार के तहत निरंतर दिए जा रहे नियुक्ति पत्र-


सीएम योगी ने कहा कि अब हमारे सामने पहचान का संकट नहीं है। प्रदेश दंगा-कर्फ्यू, बीमारी से मुक्त है। यूपी अब भारत की अर्थव्यवस्था का ग्रोथ इंजन और विकास व विरासत का नया मॉडल बनकर खड़ा है। अब पलायन नहीं होता, बल्कि यहां रोजगार की संभावनाएं हैं। मिशन रोजगार के अंतर्गत बिना भेदभाव नौजवानों को नौकरी व रोजगार की संभावनाओं से जोड़ा जा रहा है। आज ही सुबह महिला व बाल विकास विभाग की 18 हजार से अधिक आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों व सहायिकाओं को नियुक्ति पत्र दिए गए। रविवार को 665 और तीन दिन पहले 1262 नर्सिंग ऑफिसरों को नियुक्ति पत्र प्रदान किए गए।


धूमधाम से होती है गरीब की बेटी की शादी, मंत्री भी होते हैं शामिल-


सीएम योगी ने कहा कि गरीब को सुविधा का लाभ मिल रहा है। मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना में गरीब बेटी की शादी देख अच्छा लगता है। दहेज मुक्त शादी में नातेदार-रिश्तेदार, मंत्री भी आते हैं। डीएम निमंत्रण पत्र वितरित करते हैं। इस योजना में गरीब की बेटी की शादी भी धूमधाम से होती है। जब हम लोगों ने यह योजना चलाई तो सपा ने खिल्ली उड़ाई थी। अब तक 5.54 लाख बेटियों की शादी योजना के तहत हो चुकी है। प्रदेश सरकार बेटी की शादी में एक लाख रुपये की सहायता प्रदान करती है। 


अभ्युदय कोचिंग बेहतरीन पहल, और सुधार की आवश्यकता-


सीएम योगी ने कहा कि यूपी के बहुत सारे नौजवान कोचिंग में दूसरे राज्यों में गए थे। कोरोना कालखंड में लॉकडाउन के दौरान यहां की बसें भेजकर राजस्थान से बच्चों को बुलवाया गया। तब सरकार ने अभ्युदय कोचिंग शुरू की। हर जनपद में इस प्रक्रिया को तेज करने की आवश्यकता है। इसके और भी अच्छे परिणाम आ सकते हैं। गाइड व योजक के रूप में अभ्युदय कोचिंग को तैयार करना है, इसके लिए समाज कल्याण विभाग को और मेहनत करने की आवश्यकता है। यूपीपीएससी, जेईई-नीट, एनडीए, सीडीएस व अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए अभ्युदय कोचिंग प्लेटफॉर्म बने। 2020-21 में शुरू हुई इस निःशुल्क कोचिंग से 1.15 लाख से अधिक अभ्यर्थियों को सुविधा प्राप्त हो चुकी है। नवचयनित अधिकारी अपने जनपद में हर दिन एक घंटा इस कोचिंग को दें। ज्ञान की परंपरा ऐसे ही आगे बढ़ेगी। 


मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना से 7 वर्ष में लाभान्वित हुईं 26 लाख बेटियां-


सीएम योगी ने कहा कि मातृ वंदना योजना में 2026-27 के लिए 525 करोड़ का प्रावधान किया गया है। मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना से 7 वर्ष में 26 लाख बालिकाएं लाभान्वित हुई है। इस योजना के तहत नए बजट में 400 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है। नए बजट में अनेक प्रावधान किए गए हैं। कामकाजी महिलाओं के लिए लखनऊ, नोएडा, गाजियाबाद तथा मुख्यमंत्री श्रमजीवी महिला छात्रावास के तहत मेरठ, प्रयागराज, आगरा, कानपुर, झांसी, गोरखपुर में 500-500 की क्षमता वाले आधुनिक छात्रावासों के निर्माण के लिए धनराशि दी जा रही है। स्वामी विवेकानंद सशक्तीकरण योजना के तहत दो करोड़ नौजवानों को टैबलेट वितरण होगा, इसमें से 50 लाख नौजवानों को यह मिल चुका है। इसके लिए इस बजट में 2375 करोड़ रुपये रखे हैं। 


युवाओं के लिए अनेक कार्य किए सरकार ने-


सीएम योगी ने कहा कि महिला उद्यमिता सशक्तीकरण योजना में ओडीओपी के तहत हर जनपद के उत्पाद को डिस्प्ले करने व महिला उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए धनराशि की व्यवस्था की है। लौहपुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल इंप्लाइमेंट जोन के माध्यम से प्रत्येक जनपद में विश्वस्तरीय स्किल सेंटर बनेगा। यह सेंटर युवाओं को प्रशिक्षित कर रोजगार उपलब्ध कराएगा। डिजिटल इंटरप्रेन्योर योजना के तहत 8000 न्याय पंचायतों में महिला उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए डिजिटल उद्यमी तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है। सभी न्याय पंचायतों में एक-एक डिजिटल इंटरप्रेन्योर तैयार होगा। उन्हें ब्याज और गारंटी मुक्त 10 लाख रुपये का लोन उपलब्ध होगा। इसमें महिलाओं के लिए 50 फीसदी आरक्षण होगा। सीएम युवा उद्यमी विकास अभियान के तहत पिछले एक वर्ष में 1.40 लाख युवा उद्यमी तैयार हुए हैं। इन्हें पांच लाख रुपये का ब्याज व गारंटी मुक्त ऋण की सुविधा उपलब्ध कराई जा चुकी है। 


कार्यक्रम में योगी सरकार के मंत्री ओमप्रकाश राजभर, असीम अरुण, नरेंद्र कश्यप, दानिश आजाद अंसारी, संजीव गौड़, महापौर सुषमा खर्कवाल, राज्य अनुसूचित जाति/जनजाति आयोग के अध्यक्ष बैजनाथ रावत, यूपी सिडको के अध्यक्ष वाईपी सिंह आदि मौजूद रहे।

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