राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का गोवर्धन दौरा: गिरिराजजी का विशेष अभिषेक और 56 भोग से होगा स्वागत

गोवर्धन। 14 मार्च 2026


द्रोपदी मुर्मु के प्रस्तावित गोवर्धन दौरे को लेकर दानघाटी धाम में इन दिनों विशेष तैयारियाँ की जा रही हैं। 21 मार्च को राष्ट्रपति के आगमन के अवसर पर मंदिर परिसर में पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ पूजा-अर्चना की जाएगी। ब्रज की आस्था के इस प्रमुख केंद्र में भक्ति और उत्साह का माहौल है, जहाँ गिरिराजजी के सम्मान में विशेष धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए जाएंगे।


मंदिर के सेवायत रामेश्वर पुरोहित के अनुसार, राष्ट्रपति के आगमन पर मंत्रोच्चारण के बीच सबसे पहले गिरिराजजी का 11 किलो शुद्ध गाय के दूध से अभिषेक कराया जाएगा। इसके बाद दूध, दही, बूरा, शहद और गंगाजल से तैयार पंचामृत से विधिवत पूजा की जाएगी। इस दौरान गिरिराजजी को सुगंधित इत्र और ग्वाल-वस्त्र अर्पित किए जाएंगे तथा विशेष रूप से तैयार “56 भोग” की छबरिया भी अर्पित की जाएगी, जिसे बाद में महामहिम को भेंट किया जाएगा।


पूजा-अर्चना के बाद राष्ट्रपति को गिरिराजजी की प्रसादी चुनरी ओढ़ाकर सम्मानित किया जाएगा। इसके उपरांत राष्ट्रपति गोल्फकार्ट में बैठकर गोवर्धन पर्वत  की लगभग 21 किलोमीटर लंबी परिक्रमा करेंगी। राष्ट्रपति के आगमन को देखते हुए प्रशासन ने मंदिर और आसपास के क्षेत्रों में साफ-सफाई, रंगाई-पुताई और अन्य व्यवस्थाओं को तेज कर दिया है।


धार्मिक मान्यता के अनुसार, इसी स्थान पर भगवान श्रीकृष्ण ने गोपियों से माखन-दही का दान माँगा था, जिसके कारण यह स्थान “दानघाटी” के नाम से प्रसिद्ध हुआ। वर्ष 1957 में स्थापित यह मंदिर आज स्वर्ण कलश, चाँदी के द्वार और भव्य सिंहासन से सुसज्जित है। हर वर्ष देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु यहाँ पहुँचकर गिरिराजजी की 21 किलोमीटर की परिक्रमा करते हैं और अपनी यात्रा की शुरुआत प्रायः दानघाटी धाम से ही करते हैं।

 राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का गोवर्धन दौरा: गिरिराजजी का विशेष अभिषेक और 56 भोग से होगा स्वागत


द्रोपदी मुर्मु के प्रस्तावित गोवर्धन दौरे को लेकर दानघाटी धाम में इन दिनों विशेष तैयारियाँ की जा रही हैं। 21 मार्च को राष्ट्रपति के आगमन के अवसर पर मंदिर परिसर में पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ पूजा-अर्चना की जाएगी। ब्रज की आस्था के इस प्रमुख केंद्र में भक्ति और उत्साह का माहौल है, जहाँ गिरिराजजी के सम्मान में विशेष धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए जाएंगे।


मंदिर के सेवायत रामेश्वर पुरोहित के अनुसार, राष्ट्रपति के आगमन पर मंत्रोच्चारण के बीच सबसे पहले गिरिराजजी का 11 किलो शुद्ध गाय के दूध से अभिषेक कराया जाएगा। इसके बाद दूध, दही, बूरा, शहद और गंगाजल से तैयार पंचामृत से विधिवत पूजा की जाएगी। इस दौरान गिरिराजजी को सुगंधित इत्र और ग्वाल-वस्त्र अर्पित किए जाएंगे तथा विशेष रूप से तैयार “56 भोग” की छबरिया भी अर्पित की जाएगी, जिसे बाद में महामहिम को भेंट किया जाएगा।


पूजा-अर्चना के बाद राष्ट्रपति को गिरिराजजी की प्रसादी चुनरी ओढ़ाकर सम्मानित किया जाएगा। इसके उपरांत राष्ट्रपति गोल्फकार्ट में बैठकर गोवर्धन पर्वत  की लगभग 21 किलोमीटर लंबी परिक्रमा करेंगी। राष्ट्रपति के आगमन को देखते हुए प्रशासन ने मंदिर और आसपास के क्षेत्रों में साफ-सफाई, रंगाई-पुताई और अन्य व्यवस्थाओं को तेज कर दिया है।


धार्मिक मान्यता के अनुसार, इसी स्थान पर भगवान श्रीकृष्ण ने गोपियों से माखन-दही का दान माँगा था, जिसके कारण यह स्थान “दानघाटी” के नाम से प्रसिद्ध हुआ। वर्ष 1957 में स्थापित यह मंदिर आज स्वर्ण कलश, चाँदी के द्वार और भव्य सिंहासन से सुसज्जित है। हर वर्ष देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु यहाँ पहुँचकर गिरिराजजी की 21 किलोमीटर की परिक्रमा करते हैं और अपनी यात्रा की शुरुआत प्रायः दानघाटी धाम से ही करते हैं।


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