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यूपी बजट सत्र 9 फरवरी से शुरू, 11 फरवरी को पेश होगा करीब 9 लाख करोड़ रुपये का बजट
लखनऊ | 8 फरवरी 2026
उत्तर प्रदेश विधानमंडल का बजट सत्र कल, 9 फरवरी से शुरू होने जा रहा है। इस बार राज्य का बजट 11 फरवरी को पेश किया जाएगा। सत्र से पहले सत्ता और विपक्षी पार्टियों की बैठकें भी हो सकती हैं। प्रदेश सरकार का लक्ष्य इस बजट में विकास और आम लोगों की सुविधाओं को प्राथमिकता देना है। अधिकारियों ने बताया कि सड़क, पुल, शहरों का विकास और बुनियादी ढांचे पर इस बार बड़े पैमाने पर खर्च किए जाने की संभावना है।
पिछले वित्तीय वर्ष में यूपी का बजट करीब 8.08 लाख करोड़ रुपये था, जो उससे पहले के साल से 9.8 प्रतिशत अधिक था। इस बार आने वाला बजट इससे भी बड़ा होगा और इसमें जनकल्याण से जुड़ी योजनाओं पर जोर दिया जाएगा। सरकार युवाओं के रोजगार, किसानों की मदद और गरीब व जरूरतमंद वर्ग के लिए योजनाओं को और मजबूत करने की तैयारी कर रही है। शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास, खाद्य सुरक्षा और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े कार्यक्रमों को भी बढ़ावा दिया जाएगा।
सरकार के अनुमान के अनुसार, इस बार कुल बजट का करीब 25 प्रतिशत हिस्सा इंफ्रास्ट्रक्चर पर, 15 प्रतिशत शिक्षा पर, 12 प्रतिशत कृषि पर, 8 प्रतिशत स्वास्थ्य पर और 5 प्रतिशत सामाजिक सुरक्षा योजनाओं पर खर्च किया जा सकता है। सरकार का यह प्रयास रहेगा कि विकास के साथ-साथ वित्तीय संतुलन भी बनाए रखा जाए। बजट में कानून-व्यवस्था को बेहतर बनाने पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा।
विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने सत्र के सुचारु एवं सुरक्षित संचालन के लिए तैयारियों का जायजा लिया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि "सत्र के दौरान किसी भी स्तर पर सुरक्षा में चूक न हो" और सभी व्यवस्थाएं समयबद्ध तरीके से सुनिश्चित की जाएं। क्विक रिस्पॉन्स टीम (क्यूआरटी), एंटी एक्सप्लोसिव और एंटी सबोटाज जांच व्यवस्था, प्रवेश द्वारों की सुरक्षा और विधायक व सुरक्षा कर्मियों के बैठने की व्यवस्था का भी विशेष निरीक्षण किया गया। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक गरिमा और संसदीय परंपराओं की रक्षा के लिए सुरक्षा और सुविधा का संतुलन अत्यंत आवश्यक है।
यूपी बजट सत्र की तैयारियां पूरी, 11 फरवरी को पेश होगा 9 लाख करोड़ रुपये का बजट
उत्तर प्रदेश विधानमंडल का बजट सत्र कल, 9 फरवरी से शुरू हो रहा है। इस बार राज्य का बजट 11 फरवरी को पेश किया जाएगा। सत्र के पहले सत्ता और विपक्षी दलों की बैठकें हो सकती हैं। अधिकारियों ने बताया कि इस बजट में मुख्य ध्यान प्रदेश के विकास और आम लोगों की सुविधाओं पर रहेगा। विशेष रूप से सड़क, पुल, शहरों के विकास और बुनियादी ढांचे में बड़े निवेश की संभावना है।
पिछले वित्तीय वर्ष में यूपी का बजट करीब 8.08 लाख करोड़ रुपये था, जो पिछले साल की तुलना में 9.8 प्रतिशत ज्यादा था। इस बार आने वाला बजट इससे भी बड़ा होगा और इसमें जनकल्याण से जुड़े कार्यक्रमों को मजबूत करने पर जोर दिया जाएगा। सरकार युवाओं के रोजगार, किसानों की मदद और गरीब व जरूरतमंद लोगों के लिए चल रही योजनाओं में अच्छी खासी राशि खर्च करने की योजना बना रही है। साथ ही शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास, खाद्य सुरक्षा और सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रमों को और मजबूत किया जाएगा।
सरकार के अनुमान के अनुसार, कुल बजट का लगभग 25 प्रतिशत हिस्सा इंफ्रास्ट्रक्चर पर, 15 प्रतिशत शिक्षा पर, 12 प्रतिशत कृषि पर, 8 प्रतिशत स्वास्थ्य पर और 5 प्रतिशत सामाजिक सुरक्षा योजनाओं पर खर्च किया जाएगा। इसके अलावा, बजट में कानून-व्यवस्था और सुरक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने पर भी ध्यान दिया जाएगा। सरकार का प्रयास रहेगा कि विकास के साथ वित्तीय संतुलन भी बनाए रखा जाए।
विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने सत्र के सुरक्षित और सुचारू संचालन की तैयारियों का निरीक्षण किया। उन्होंने अधिकारियों को कहा कि "सत्र के दौरान किसी भी स्तर पर सुरक्षा में चूक न हो" और सभी व्यवस्थाएं समय पर पूरी की जाएं। क्विक रिस्पॉन्स टीम (क्यूआरटी), एंटी एक्सप्लोसिव और एंटी सबोटाज जांच, प्रवेश द्वार की सुरक्षा और विधायकों के साथ आने वाले सुरक्षा कर्मियों की व्यवस्था का भी ध्यान रखा गया। अध्यक्ष ने कहा कि लोकतांत्रिक गरिमा और संसदीय परंपराओं की रक्षा के लिए सुरक्षा और सुविधा का संतुलन बेहद जरूरी है।
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