Pakistan’s India Boycott: The Only Lever Left to Shake the Cricketing Ecosystem, Says Mark Butcher
यूपी में बुलडोजर कार्रवाई पर हाईकोर्ट सख्त, सरकार से पूछा– क्या यह सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अनदेखी नहीं?
प्रयागराज | 04 फरवरी 2026
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश में हो रही बुलडोजर कार्रवाई को लेकर कड़ी नाराजगी जताई है। न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन की खंडपीठ ने राज्य सरकार से सवाल किया कि जब वर्ष 2025 में इस तरह की कार्रवाई पर रोक लगाई गई थी, तो उसके बावजूद ध्वस्तीकरण की कार्रवाई जारी रखना क्या सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अवहेलना नहीं है। कोर्ट ने यह भी पूछा कि क्या यह कार्यपालिका द्वारा अपनी मंशा छिपाकर शक्तियों के दुरुपयोग का उदाहरण नहीं है।
यह टिप्पणी हमीरपुर निवासी फैमुद्दीन और दो अन्य की ओर से दाखिल याचिका पर सुनवाई के दौरान की गई। याचिका में बताया गया कि फैमुद्दीन के परिवार के आफान खान के खिलाफ 16 जनवरी 2026 को सुमेरपुर थाने में आईटी एक्ट, पॉक्सो एक्ट और धर्मांतरण निरोधक कानून के तहत एफआईआर दर्ज हुई थी। आरोप है कि घटना के बाद गुस्साई भीड़ ने फैमुद्दीन के घर को निशाना बनाया, जबकि वे खुद इस मामले में आरोपी नहीं हैं।
याचिकाकर्ता ने कोर्ट को बताया कि इसके बावजूद उन्हें नोटिस भेजा गया और उनके लॉज व मिल को सील कर दिया गया। इसी आधार पर उन्होंने आशंका जताई कि उनकी संपत्तियों को बुलडोजर से गिराया जा सकता है। इस संभावित कार्रवाई को रोकने के लिए उन्होंने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।
वहीं, राज्य सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता अनूप त्रिवेदी ने दलील दी कि याचिका अभी अपरिपक्व है। उन्होंने कहा कि आवास और लॉज सील नहीं किए गए हैं और याचिकाकर्ताओं ने मिल से प्रतिबंधित लकड़ी बरामद होने का तथ्य छिपाया है। सरकार की ओर से यह भरोसा भी दिलाया गया कि किसी भी तरह की कार्रवाई से पहले कानूनी प्रक्रिया और सुनवाई का पूरा अवसर दिया जाएगा।
: बुलडोजर कार्रवाई पर हाईकोर्ट की सख्ती, सरकार से पूछा– आदेशों की अनदेखी क्यों?
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश में हो रही बुलडोजर कार्रवाई को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन की खंडपीठ ने सरकार से सवाल किया कि जब साल 2025 में इस तरह की कार्रवाई पर रोक लगी थी, तो उसके बाद भी ध्वस्तीकरण कैसे किया जा रहा है। कोर्ट ने पूछा कि क्या यह सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अवहेलना नहीं है।
यह मामला हमीरपुर के रहने वाले फैमुद्दीन और दो अन्य की याचिका से जुड़ा है। याचिका में बताया गया कि फैमुद्दीन के परिवार के सदस्य आफान खान के खिलाफ 16 जनवरी 2026 को आईटी एक्ट, पॉक्सो एक्ट और धर्मांतरण निरोधक कानून के तहत एफआईआर दर्ज हुई थी। इसके बाद गुस्साई भीड़ ने फैमुद्दीन के घर को निशाना बनाया, जबकि वे खुद इस मामले में आरोपी नहीं हैं।
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि इसके बावजूद उन्हें नोटिस भेजे गए और उनके लॉज व मिल को सील कर दिया गया। उन्हें डर है कि उनकी संपत्तियों पर बुलडोजर चलाया जा सकता है। इसी आशंका के चलते उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर राहत की मांग की है।
वहीं राज्य सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता अनूप त्रिवेदी ने कहा कि याचिका अभी पूरी तरह तैयार नहीं है। उनका कहना था कि आवास और लॉज सील नहीं किए गए हैं और मिल से प्रतिबंधित लकड़ी मिलने की बात याचिकाकर्ताओं ने छिपाई है। सरकार ने यह भी भरोसा दिलाया कि बिना कानूनी प्रक्रिया और सुनवाई के कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी।
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