PM विश्वकर्मा योजना: रोजाना 500 रुपये स्टाइपेंड और सस्ते लोन का मौका

नई दिल्ली | 04 फरवरी 2026


केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री विश्वकर्मा कौशल सम्मान योजना पारंपरिक कारीगरों और श्रमिकों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के उद्देश्य से चलाई जा रही है। इस योजना के तहत लाभार्थियों को न सिर्फ प्रशिक्षण दिया जाता है, बल्कि ट्रेनिंग के दौरान रोजाना 500 रुपये का स्टाइपेंड भी मिलता है। इसके अलावा टूलकिट खरीदने के लिए आर्थिक सहायता और कम ब्याज पर लोन की सुविधा भी दी जाती है। अगर आप भी इस योजना से जुड़ना चाहते हैं, तो सबसे पहले आपको अपनी पात्रता जांचनी होगी।


सरकार ने साफ किया है कि इस योजना का लाभ केवल पारंपरिक व्यवसायों से जुड़े लोगों को ही मिलेगा। योजना से जुड़ने के लिए आवेदक की उम्र कम से कम 18 साल होनी चाहिए। इसके साथ ही व्यक्ति किसी मान्यता प्राप्त पारंपरिक पेशे से जुड़ा होना जरूरी है। सरकार ने कुल 18 ऐसे पारंपरिक व्यवसायों की सूची तय की है, जिनके कारीगर इस योजना के लिए पात्र माने जाएंगे।


इस योजना के तहत जिन लोगों को पात्र माना गया है, उनमें अस्त्रकार, पत्थर तराशने वाले, मूर्तिकार, मोची या जूता बनाने वाले कारीगर, मालाकार, फिशिंग नेट निर्माता, हथौड़ा और टूलकिट निर्माता, ताला बनाने वाले, टोकरी, चटाई और झाड़ू बनाने वाले, पत्थर तोड़ने वाले, धोबी, दर्जी, लोहार, नाव निर्माता, राजमिस्त्री, गुड़िया और खिलौना निर्माता तथा नाई यानी बाल काटने वाले शामिल हैं। इन पारंपरिक कामों से जुड़े लोग ही इस योजना का लाभ उठा सकते हैं।


लाभ की बात करें तो योजना के तहत चयनित लाभार्थियों को कुछ दिनों की एडवांस ट्रेनिंग दी जाती है, जिसके दौरान रोजाना 500 रुपये स्टाइपेंड दिया जाता है। इसके अलावा काम के लिए जरूरी औजार खरीदने हेतु 15,000 रुपये की टूलकिट सहायता मिलती है। सरकार पहले चरण में 18 महीनों के लिए 1 लाख रुपये का लोन सस्ती ब्याज दर पर देती है। इसके बाद जरूरत पड़ने पर 30 महीनों के लिए अतिरिक्त 2 लाख रुपये का लोन भी लिया जा सकता है। यह योजना पारंपरिक कारीगरों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।

PM विश्वकर्मा योजना से बदलेगी कारीगरों की किस्मत, ट्रेनिंग के दौरान मिलेंगे रोजाना 500 रुपये


केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री विश्वकर्मा कौशल सम्मान योजना पारंपरिक कारीगरों और श्रमिकों को मजबूत बनाने के लिए चलाई जा रही है। इस योजना के तहत लाभार्थियों को आधुनिक प्रशिक्षण दिया जाता है और ट्रेनिंग के समय रोजाना 500 रुपये का स्टाइपेंड भी मिलता है। इसके साथ ही सरकार आर्थिक सहायता और सस्ते लोन की सुविधा देकर लोगों को आत्मनिर्भर बनाने की कोशिश कर रही है।


इस योजना का लाभ लेने के लिए कुछ जरूरी शर्तें तय की गई हैं। आवेदन करने वाले की उम्र कम से कम 18 साल होनी चाहिए। साथ ही वह व्यक्ति किसी पारंपरिक काम से जुड़ा होना जरूरी है। सरकार ने साफ किया है कि योजना का लाभ केवल 18 पारंपरिक व्यवसायों से जुड़े लोगों को ही दिया जाएगा, ताकि सही लोगों तक मदद पहुंच सके।


योजना के लिए पात्र माने जाने वाले कामों में अस्त्रकार, पत्थर तराशने वाले, मूर्तिकार, मोची, मालाकार, फिशिंग नेट बनाने वाले, हथौड़ा और टूलकिट निर्माता, ताला बनाने वाले, टोकरी, चटाई और झाड़ू बनाने वाले, पत्थर तोड़ने वाले, धोबी, दर्जी, लोहार, नाव निर्माता, राजमिस्त्री, गुड़िया और खिलौना निर्माता और नाई शामिल हैं। इन पारंपरिक पेशों से जुड़े लोग ही योजना के तहत आवेदन कर सकते हैं।


लाभ की बात करें तो लाभार्थियों को कुछ दिनों की एडवांस ट्रेनिंग दी जाती है, जिसके दौरान रोजाना 500 रुपये स्टाइपेंड मिलता है। इसके अलावा काम के लिए जरूरी औजार खरीदने के लिए 15,000 रुपये की टूलकिट सहायता दी जाती है। सरकार पहले चरण में 18 महीनों के लिए 1 लाख रुपये का लोन देती है और इसके बाद जरूरत पड़ने पर 30 महीनों के लिए 2 लाख रुपये तक का अतिरिक्त लोन भी उपलब्ध कराया जाता है।


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