पीएम मोदी ने गुजरात के चिप संयंत्र में महिलाओं की भागीदारी को सराहा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को भारत के तेजी से विकसित हो रहे सेमीकंडक्टर उद्योग में युवा कार्यबल, विशेषकर दूरदराज और आदिवासी क्षेत्रों से आने वाली महिला कर्मचारियों की भूमिका को रेखांकित किया। यह टिप्पणी उन्होंने गुजरात के सानंद में एक दिन पहले सीजी सेमी आउटसोर्स्ड सेमीकंडक्टर असेंबली एंड टेस्ट (ओसैट) सुविधा का उद्घाटन करने के बाद की। सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर एक पोस्ट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि गुजरात के सानंद में नव उद्घाटित सेमीकंडक्टर संयंत्र में कर्मचारियों के साथ उनकी बातचीत इस दौरे के "सबसे विशेष क्षणों में से एक" रही। उन्होंने कहा कि इस संयंत्र में कार्यरत कर्मचारियों का एक बड़ा वर्ग देश के दूरदराज के क्षेत्रों से आने वाली महिलाओं का है, जिनमें कई आदिवासी समुदायों से हैं। इन सभी ने सेमीकंडक्टर विनिर्माण में काम करने के लिए विशेष प्रशिक्षण प्राप्त किया है।

प्रधानमंत्री ने लिखा, "वे भारत के दूरस्थ क्षेत्रों से आती हैं और उनमें से कई आदिवासी पृष्ठभूमि से हैं लेकिन उनके अद्भुत जज्बे ने उन्हें सेमीकंडक्टर तकनीक सीखने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने प्रशिक्षण लिया और आज वे भारत की सेमीकंडक्टर यात्रा को नई ताकत दे रही हैं।" उन्होंने आगे लिखा, "हमारी युवा शक्ति पर गर्व!"

शनिवार को सानंद स्थित संयंत्र में कर्मचारियों से बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने एक युवा महिला कर्मचारी से पूछा कि वहां बिताए गए एक वर्ष में उन्हें सबसे अधिक खुशी किस बात से मिली।

महिला कर्मचारी ने बताया कि उनके गांव में परिवार आमतौर पर बेटियों को उच्च शिक्षा के लिए घर से बाहर नहीं भेजते, लेकिन सेमीकंडक्टर संयंत्र में नौकरी मिलने के बाद लोगों की सोच बदल गई है।

उन्होंने कहा, "मेरे गांव में कोई भी परिवार अपनी बेटी को पढ़ाई के लिए बाहर नहीं भेजता लेकिन अब जब मैं गांव लौटती हूं तो सभी हैरान रह जाते हैं। वे पूछते हैं कि मैं कहां रहती हूं और क्या पढ़ाई करती हूं। मैं उन्हें बताती हूं कि मैं सीजी सेमी में काम करती हूं और यह मेरे लिए बहुत बड़ा अवसर है। लोग इस बात से बेहद खुश हैं कि मैं आत्मनिर्भर बन गई हूं। मेरी सहेलियां भी पूछती हैं कि क्या उन्हें भी यहां आने का मौका मिल सकता है, तो मैं कहती हूं कि हां, आओ और यहां काम करो।"

प्रधानमंत्री मोदी ने जम्मू-कश्मीर के कठुआ जिले के कर्मचारी कौशल कुमार से भी बातचीत की। उन्होंने पूछा कि क्या यह उनकी गुजरात की पहली यात्रा है और साथ ही राज्य की भीषण गर्मी का भी जिक्र किया। इस पर कौशल कुमार ने बताया कि यह उनका गुजरात का पहला दौरा है।

झारखंड के गिरिडीह जिले की एक अन्य महिला कर्मचारी ने प्रधानमंत्री को बताया कि उन्होंने बिरनी स्थित कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय से 12वीं की पढ़ाई पूरी करने के बाद औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई) का कोर्स किया और फिर सीजी सेमी में उनका चयन हुआ। उन्होंने बताया कि इस नौकरी के कारण उन्हें विदेश यात्रा का अवसर भी मिला।

जब प्रधानमंत्री मोदी ने पूछा कि क्या लोग अक्सर आईटीआई की पढ़ाई को कमतर आंकते हैं, तो महिला कर्मचारी ने कहा कि उनके गांव के लोग शुरुआत में मानते थे कि वह जीवन में कुछ खास नहीं कर पाएंगी।

उन्होंने कहा, "पहले लोग सोचते थे कि मैं सिर्फ गांव की एक लड़की हूं, जो पढ़ाई के लिए बाहर चली गई है और कुछ नहीं कर पाएगी। जब मैं रांची में थी, तब लोग कहते थे कि मैं बस समय बिता रही हूं। लेकिन अब उन्हें एहसास हो गया है कि मैं वास्तव में कुछ सार्थक कर रही हूं।"

ये बातचीत प्रधानमंत्री मोदी द्वारा सीजी सेमी की आउटसोर्स्ड सेमीकंडक्टर असेंबली एंड टेस्ट (ओसैट) सुविधा के उद्घाटन के बाद हुई। इस संयंत्र में अब व्यावसायिक उत्पादन शुरू हो चुका है।

करीब 7,500 करोड़ रुपये के निवेश से स्थापित यह परियोजना 'इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन' के तहत उत्पादन शुरू करने वाली भारत की तीसरी सेमीकंडक्टर विनिर्माण इकाई है।

इस संयंत्र में ऑटोमोबाइल, औद्योगिक और उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे क्षेत्रों के लिए सेमीकंडक्टर चिप्स की पैकेजिंग और परीक्षण किया जाएगा, जिससे देश के घरेलू सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम को और मजबूती मिलेगी।

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