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FASTag को लेकर बड़ा बदलाव: नंबर प्लेट स्कैन से होगा टोल भुगतान, लेकिन फास्टैग अभी रहेगा जरूरी
नई दिल्ली | 11 फरवरी 2026
केंद्र सरकार एक्सप्रेसवे और राष्ट्रीय राजमार्गों पर टोल वसूली को और आसान बनाने की दिशा में एक नई तकनीक लाने की तैयारी कर रही है। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ऑटोमैटिक नंबर प्लेट स्कैन सिस्टम लागू करने पर काम कर रहा है। यह नई व्यवस्था मार्च 2026 से कुछ चुनिंदा हाईवे और एक्सप्रेसवे पर शुरू की जा सकती है। इसके तहत सड़क किनारे लगे कैमरे चलते वाहनों की नंबर प्लेट स्कैन करेंगे और तय दूरी के आधार पर टोल की गणना होगी।
फिलहाल देश में करीब 1.5 लाख किलोमीटर के राष्ट्रीय राजमार्ग और एक्सप्रेसवे नेटवर्क में से लगभग 45 हजार किलोमीटर पर टोल वसूला जाता है। देशभर में एक हजार से ज्यादा टोल प्लाजा हैं, जहां अक्सर वाहनों की लंबी कतारें देखने को मिलती हैं। खासकर तब परेशानी बढ़ जाती है जब किसी वाहन में फास्टैग न हो या उसका खाता ब्लॉक या निष्क्रिय हो।
नई प्रणाली में भौतिक टोल बैरियर हटाने की योजना है। सरकार ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन यानी ANPR तकनीक का इस्तेमाल करेगी। हाईवे पर लगे कैमरे वाहन की नंबर प्लेट पहचानेंगे और जितनी दूरी वाहन तय करेगा, उसी के हिसाब से टोल राशि तय होगी। इस तकनीक के लिए कुछ जगहों पर टेंडर भी जारी किए जा चुके हैं और आगे इसे पूरे देश में लागू करने की योजना है।
हालांकि, मंत्रालय ने साफ किया है कि इस नई व्यवस्था के बाद भी फास्टैग की आवश्यकता बनी रहेगी। टोल की राशि मौजूदा भुगतान प्रणाली के जरिए ही कटेगी, यानी फास्टैग के माध्यम से। कैमरे सिर्फ वाहन की पहचान और दूरी तय करने का काम करेंगे। आम यात्रियों के लिए इसका मतलब यह है कि टोल प्लाजा पर रुकने की जरूरत कम होगी, लंबी लाइनों से राहत मिलेगी और सफर का समय घटेगा। लेकिन फिलहाल वाहन चालकों को अपना फास्टैग सक्रिय और रिचार्ज रखना जरूरी होगा।
FASTag को लेकर बड़ा बदलाव: नंबर प्लेट स्कैन से होगा टोल भुगतान, सफर बनेगा आसान
केंद्र सरकार एक्सप्रेसवे और राष्ट्रीय राजमार्गों पर टोल वसूली को और सरल बनाने के लिए नया कदम उठाने जा रही है। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय "ऑटोमैटिक नंबर प्लेट स्कैन सिस्टम" लागू करने की तैयारी में है। इस व्यवस्था के तहत हाईवे पर लगे कैमरे वाहनों की नंबर प्लेट पढ़ेंगे और तय दूरी के हिसाब से टोल की गणना करेंगे। यह योजना मार्च 2026 से कुछ चुनिंदा रास्तों पर शुरू हो सकती है।
फिलहाल देश में हजार से ज्यादा टोल प्लाजा हैं, जहां अक्सर लंबी कतारें लग जाती हैं। कई बार FASTag न होने या खाते में बैलेंस खत्म होने से यात्रियों को ज्यादा इंतजार करना पड़ता है। इसी परेशानी को कम करने के लिए सरकार नई तकनीक पर काम कर रही है, ताकि टोल प्लाजा पर रुकने की जरूरत कम हो।
नई व्यवस्था में भौतिक टोल बैरियर हटाए जा सकते हैं और "ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR)" तकनीक का इस्तेमाल होगा। कैमरे वाहन की पहचान करेंगे और दूरी के अनुसार टोल तय करेंगे। हालांकि, भुगतान की प्रक्रिया मौजूदा सिस्टम से ही होगी और FASTag अभी भी जरूरी बना रहेगा।
आम लोगों के लिए यह बदलाव राहत लेकर आएगा। सफर के दौरान रुकावटें कम होंगी, समय बचेगा और यात्रा ज्यादा सुगम होगी। हालांकि वाहन चालकों को यह ध्यान रखना होगा कि उनका FASTag सक्रिय और रिचार्ज रहे, ताकि टोल भुगतान में कोई दिक्कत न हो।
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