प्रोजेक्ट प्रवीण’ कौशल योजना पर सख्त निगरानी: अब प्रशिक्षण से सीधे रोजगार तक की होगी ट्रैकिंग

लखनऊ | 23 मार्च 2026


उत्तर प्रदेश के माध्यमिक विद्यालयों में संचालित ‘प्रवीण’ कौशल योजना को लेकर सरकार ने अब सख्त निगरानी व्यवस्था लागू करने की तैयारी कर ली है। अपर मुख्य सचिव, माध्यमिक शिक्षा पार्थ सारथी सेन शर्मा ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश जारी करते हुए स्पष्ट किया है कि यह योजना अब केवल कागजी प्रक्रिया तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इसका सीधा संबंध छात्रों के रोजगार और आत्मनिर्भरता से जोड़ा जाएगा।


इस योजना के तहत कक्षा 9 से 12 तक के विद्यार्थियों को प्रतिदिन 90 मिनट का कौशल प्रशिक्षण दिया जा रहा है। वर्ष 2022-23 में 150 स्कूलों से शुरू हुई यह योजना अब 2025-26 तक बढ़कर 500 से अधिक राजकीय विद्यालयों तक पहुंच चुकी है। साथ ही, सहायताप्राप्त विद्यालयों में भी इसे लागू करने के लिए सर्वे का कार्य जारी है।


नई व्यवस्था के अनुसार, जिलाधिकारी स्तर पर स्कूलों का निरीक्षण कर प्रशिक्षण की वास्तविक स्थिति का मूल्यांकन किया जाएगा। लैब में उपलब्ध उपकरणों, प्रशिक्षकों की उपस्थिति, उनके द्वारा दिए जा रहे प्रशिक्षण की गुणवत्ता और स्कूल प्रशासन तथा कौशल विकास मिशन के बीच समन्वय की नियमित समीक्षा की जाएगी। इसके साथ ही, प्रशिक्षण के परिणामों पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा, जैसे कितने छात्रों को प्रमाणपत्र मिला और कितने छात्र रोजगार या स्वरोजगार से जुड़े।


सरकार का उद्देश्य शिक्षा को सीधे रोजगार से जोड़ना है, ताकि युवा केवल डिग्रीधारी न बनें, बल्कि कौशलयुक्त होकर आत्मनिर्भर बन सकें। अगले शैक्षणिक सत्र से ‘प्रोजेक्ट प्रवीण’ का विस्तार सहायताप्राप्त विद्यालयों तक किया जाएगा और आगे चलकर निजी विद्यालयों को भी इसमें शामिल किया जाएगा। कौशल विकास मिशन ने अगले सत्र में पांच लाख विद्यार्थियों को प्रशिक्षण देने का लक्ष्य निर्धारित किया है।

 ‘प्रोजेक्ट प्रवीण’ कौशल योजना पर सख्त निगरानी: अब प्रशिक्षण से सीधे रोजगार तक की होगी ट्रैकिंग


उत्तर प्रदेश के माध्यमिक विद्यालयों में संचालित ‘प्रवीण’ कौशल योजना को लेकर सरकार ने अब सख्त निगरानी व्यवस्था लागू करने की तैयारी कर ली है। अपर मुख्य सचिव, माध्यमिक शिक्षा पार्थ सारथी सेन शर्मा ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश जारी करते हुए स्पष्ट किया है कि यह योजना अब केवल कागजी प्रक्रिया तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इसका सीधा संबंध छात्रों के रोजगार और आत्मनिर्भरता से जोड़ा जाएगा।


इस योजना के तहत कक्षा 9 से 12 तक के विद्यार्थियों को प्रतिदिन 90 मिनट का कौशल प्रशिक्षण दिया जा रहा है। वर्ष 2022-23 में 150 स्कूलों से शुरू हुई यह योजना अब 2025-26 तक बढ़कर 500 से अधिक राजकीय विद्यालयों तक पहुंच चुकी है। साथ ही, सहायताप्राप्त विद्यालयों में भी इसे लागू करने के लिए सर्वे का कार्य जारी है।


नई व्यवस्था के अनुसार, जिलाधिकारी स्तर पर स्कूलों का निरीक्षण कर प्रशिक्षण की वास्तविक स्थिति का मूल्यांकन किया जाएगा। लैब में उपलब्ध उपकरणों, प्रशिक्षकों की उपस्थिति, उनके द्वारा दिए जा रहे प्रशिक्षण की गुणवत्ता और स्कूल प्रशासन तथा कौशल विकास मिशन के बीच समन्वय की नियमित समीक्षा की जाएगी। इसके साथ ही, प्रशिक्षण के परिणामों पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा, जैसे कितने छात्रों को प्रमाणपत्र मिला और कितने छात्र रोजगार या स्वरोजगार से जुड़े।


सरकार का उद्देश्य शिक्षा को सीधे रोजगार से जोड़ना है, ताकि युवा केवल डिग्रीधारी न बनें, बल्कि कौशलयुक्त होकर आत्मनिर्भर बन सकें। अगले शैक्षणिक सत्र से ‘प्रोजेक्ट प्रवीण’ का विस्तार सहायताप्राप्त विद्यालयों तक किया जाएगा और आगे चलकर निजी विद्यालयों को भी इसमें शामिल किया जाएगा। कौशल विकास मिशन ने अगले सत्र में पांच लाख विद्यार्थियों को प्रशिक्षण देने का लक्ष्य निर्धारित किया है।


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